GOTEGAON क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में धान की रोपाई का कार्य तेज, पारंपरिक के साथ हाईब्रिड किस्मों की खेती की ओर बढ़ रहा किसानों का रुझान।
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गोटेगांव क्षेत्र के आसपास के ग्रामीण और सुदूर अंचलों में इन दिनों खरीफ सीजन पूरे शबाब पर है। सोयाबीन और मक्का की बुआई के बाद अब किसानों ने धान की रोपाई का कार्य भी तेज कर दिया है। गांव-गांव के खेतों में किसान और कृषि मजदूर बारिश से लबालब भरे खेतों में धान के पौधों की रोपाई करते नजर आ रहे हैं।
किसान पहले तैयार की गई धान की क्यारियों से पौध निकालकर पानी से भरे खेतों में रोपाई कर रहे हैं। मानसून की अच्छी बारिश के चलते खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, जिससे धान की रोपाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
नरसिंहपुर जिले की प्रमुख फसलें गन्ना, सोयाबीन और गेहूं मानी जाती हैं, लेकिन खरीफ सीजन में धान की खेती भी यहां बड़े पैमाने पर की जाती है। क्षेत्र में छतरी, जीरा शंकर, कालीमूंछ और दुबराज जैसी पारंपरिक धान की किस्में आज भी किसानों की पहली पसंद बनी हुई हैं। वहीं अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक हाईब्रिड धान की किस्मों का रकबा भी लगातार बढ़ रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के लिए जून और जुलाई सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। मानसून की शुरुआत के बाद खेतों में पर्याप्त जलभराव होने से पौधों का विकास बेहतर होता है और अच्छी पैदावार की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, स्थानीय जलवायु और धान की किस्म के अनुसार रोपाई का समय कुछ क्षेत्रों में आगे-पीछे भी हो सकता है।
किसानों को उम्मीद है कि यदि इस वर्ष मानसून का साथ इसी तरह बना रहा, तो जिले में धान का उत्पादन बेहतर होगा और उन्हें अच्छी उपज के साथ उचित आर्थिक लाभ भी मिलेगा।






