श्रीनगर/ रोहित यादव- आषाढ़ माह अमाशय की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकाली जाती है। प्राचीन कथा के अनुसार जब भगवान अस्वस्थ होते हैं तो। एक माह तक वह भक्तों को दर्शन नहीं दे पाते हैं। जिसमें वैद्य भगवान का इलाज करते हैं जब भगवान स्वस्थ हो जाते हैं तो जगन्नाथ जी अपनी मौसी के घर जाते हैं इसीअनुसार। जगन्नाथ पुरी में भी प्रतिवर्ष रथ यात्रा निकाली जाती है इसी के तहत श्रीनगर में भी ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के द्वारा श्रीनगर के जगन्नाथ मंदिर का जीवउद्धार करायागया तभी से यह परंपरा श्रीनगर में चल रही है कि भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा केसाथ। अपनी मौसी के घर जाते हैं
9 दिन तक अपनी मौसी के यहां रहते हैं
भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के यहां 9 दिन रहते हैं जहां अपने मंदिर से निकलकर भगवान भक्तों को दर्शन देने के लिए द्वार द्वार जाते हैं। भगवान का जगह-जगह पूजन अर्चन किया और श्रीनगर के भक्तों का कहना है कि। जब जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज रहते थे तो। Jagannath Yatra वह रथ यात्रा में शामिल होते थे। और कहीं बारिश हो चाहे ना हो लेकिन श्रीनगर में रथ निकलता था तो बारिश होती थी वैसे ही आज भी क्षेत्र में अधिकांश जगह बारिश नहीं हुई लेकिन जैसे ही श्रीनगर में भगवान जगन्नाथ जी अपने मंदिर से रथ पर बैठे और रथ यात्रा प्रारंभहुई और जैसे मानो इंद्रदेव ने भगवान की अगवानी के लिए बारिश चालू कर दी। झमाझम बारिश के बीच में भक्तों ने जय कारों के साथ भगवान की रथ यात्रा में शामिल हुए। रथ यात्रा में छोटे बच्चों से लेकर बुद्ध बू बुजुर्ग महिलाये भी भगवान कि रथ यात्रा में झमाझम बारिश में बीच रथ को खींचा हजारों की संख्या में भक्तजन शामिल हुए। देव सयानी एकादशी को भगवान अपने धाम वापस आएंगे जहां श्रीनगर में मेले का आयोजन किया जाएगा





